January 1

ख़ुशी का दूसरा पाठ!

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अतुल एक कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर है. मध्यमवर्गीय परिवार से है और ज़िन्दगी में अच्छी प्रगति की है. उसके परिवार के लोग इकठ्ठा होते हैं तो अक्सर ज़िक्र होता है कि कैसे उसने मेहनत की, कैसे वो उन लोगों के बीच सबसे सफलतम व्यक्ति है. लेकिन उसके मन में एक संघर्ष हमेशा चलता रहता है. वो खुश नहीं रहता. और इसी ख़ुशी की तलाश में वो एक 'हैप्पीनेस वर्कशॉप' में पहुँच गया.

20 मार्च को दुनियाभर में ‘हैप्पीनेस-डे’ मनाया जाता है, इसी अवसर पर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था. शुरुआत में कार्यशाला के संचालक अमीन साहब ने सबका परिचय लिया और बोले, 'आप में से कई लोग कंपनियों में मैनेजर हैं, कुछ खुद का व्यवसाय कर रहे हैं, कुछ लोग प्रशासन के अधिकारी हैं. आप सब कामयाब लोग हैं. आपको इस कार्यशाला में आने की ज़रूरत ही नहीं!'

लेकिन प्रतिभागी सहमत न हुए. अतुल ने कहा, 'लोग समझते हैं कि मैं कामयाब हूँ. लेकिन अभी मुझे बहुत कुछ करना है. कॉलेज के मेरे साथी मुझ से आगे निकल चुके हैं. कंपनी में भी जो लोग मेरे समकक्ष थे वो अब ज़्यादा तनख्वाह पा रहे हैं. दिन-रात ये बात मुझे सताती रहती है. इसीलिए मैं ये जानने आया हूँ कि मैं खुश कैसे रहूँ?'

एक प्रशासनिक अधिकारी बोले, 'कमोबेश यही स्थिति मेरी भी है.' एक व्यवसायी सज्जन बोले, 'जितनी मेहनत मैं करता हूँ उतनी सफलता मुझे नहीं मिलती. मेरी ही इंडस्ट्री में व्यवसाय करनेवाले मेरे साढ़ू भाई ने पिछले साल अच्छा ख़ासा मुनाफा कमाया. लेकिन पिछले दो सालों से मेरा व्यवसाय जहाँ का तहाँ थम गया है. अब ऐसे हालात मैं खुश कैसे रहा जा सकता है?'

अमीन जी मुस्कुराये, 'आपकी बातों में ही ख़ुशी का पहला पाठ छुपा है. लोग समझते हैं कि सफलता मिलेगी तो ख़ुशी भी जीवन में आएगी. लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं. सफलता के साथ ख़ुशी का कोई गहरा नाता नहीं है. अगर दुनिया की नज़रों से देखेंगे तो आप सब लोग सफल हैं. लेकिन आप ख़ुशी को खोज रहे हैं. जब कि कई लोग झुग्गी-झोपड़ियों में रहकर भी खुश रह लेते हैं. कभी सड़क पर खेलनेवाले बच्चों की आँखों की चमक देखेंगे तो शायद आपको समझ आएगा मैं क्या कहना चाहता हूँ.'

सब गहरे विचार में थे. कुछ देर बाद अतुल ने कहा, 'क्योंकि वो बिना मकसद के जीते हैं. उन्हें अपने आसपास की गन्दगी से भी फ़र्क़ नहीं पड़ता. जब कि हम लोग बड़े ख्वाब देखते हैं. क्या ख्वाब देखना गलत है?' अमीन साहब बोले, 'ख्वाब देखिये. सफलता के लिए मेहनत भी कीजिये लेकिन सफलता का दूसरा पाठ याद रखिये!' सब लोग उत्सुकता से उनके अगले शब्दों का इंतज़ार कर रहे थे.

उन्होंने कहा, 'दूसरों का सुख हमारे सुख से बड़ा क्यों है यही दुनिया का सबसे बड़ा दुःख है! इस तुलना से बचिए. जो आपको मिला है उसका शुक्र अदा कीजिये. उसका आनंद लीजिये. दूसरों से आगे रहने के चक्कर में सुबह के सूरज की लाली को मत भूल जाइये, रात को आसमान में चमकते तारों को अनदेखा मत कीजिये. ख़ुशी तो चारो तरफ बिखरी है. उसको आप गिन नहीं सकते, उसकी तुलना नहीं कर सकते. आइये मुस्कुरायें कि हम सब आज साथ हैं!

एक्शन पॉइंट: दूसरों के साथ तुलना से बचिए. जो आपको मिला है उसका भरपूर आनंद लीजिये!


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